
वृंदावन प्यारो वृंदावन भजन जैसी ही महाराज जी ने गाया झूम उठे श्रृद्धालू।
मेरी दृष्टि में तो वृंदावन गढ़ाकोटा है पूज्य महाराज जी ने कहा कि ऐसे रसिकाचार्य जिन्होंने इस बुंदेलखण्ड एवं गढ़ाकोटा की पावन धारा पर श्रीवृंदावन के दर्श करा दियेे। जिनके उपर उनकी करुणामयी दृष्टि युगल सरकार की बनी रहती है उन पर जिनके हृदय में युगल सरकार विराजमान है | उनको यह संसार नहीं दिखता उनको तो हर जगह इस संसार में हर छवि में श्री गोविंद जी दिखते हैं | वो तो हर क्षण हर समय उनके हृदय में प्राण धन जीवन धन युगल सरकार ही हैं ऐसे रसिक आचार्य को चारों ओर गोविंद नजर आते हैं | सब में प्रभु का अवलोकन करना श्री नामदेव जी महाराज के चरित्र में सब जीवों में दर्शन करना और अपने इष्ट देखना यही श्री नामदेव जी महाराज का दर्शन था ब्रम्ह मुहूर्त का समय सुबह 4 बजे होती है इसमें चारों ओर देवी देवताओं का वास रहता है और मध्यरात्रि का समय 01 बजे से 3 बजे तक रहता है जिसमें आसक्ति प्रेत आत्माएं भ्रमण करती है इसलिए आचार्य ब्रम्ह मुहूर्त में वंदना करते हैं | श्री नामदेव महाराज जी का प्रसंग सुनाया उनकी भक्ति का वर्णन किया, नामदेव महाराज की कुटिया जल रही थी और नामदेव जी कह रहे थे कि हमारे ठाकुर जी इसमें आये हैं |आग की लपट जो दिख रही है उसी अग्नि से श्री ठाकुर जी प्रकट हो गये और नामदेव जी महाराज को पांडरूक जी अपने गले से लगा लेते हैं धन्य है | नामदेव जी महाराज इस अग्नि में भी उनको केवल ठाकुर जी ही नजर आ रहे थे ऐसी भक्ति धन्य है। नामदेव जी महाराज की मां ने कहा कि नामा तू कहता है कि पांडरूक जी तेरे साथ खेलते हैं मै तब मानूंगी सब हमारे यहां आये और मां का दर्शन दें। तो नामदेव जी महाराज श्री पांडरूक विट्ठल जी ने अपने सिंहासन पर नामदेव जी को बैठाया और मां को दर्षन देने चले गये। ऐसी भक्ति श्री नामदेव जी महाराज की थी। फिर परम पूज्यनीय श्री श्री स्वामी महंत श्री किशोरदास देव जू महाराज श्री राम वृंदावन ने अपनी अमृतमय वाणी से कहा कि सेवकों ने जाकर गुरूदेव भगवान को प्रणाम किया और वहां प्रमाण करके श्री स्वामी जी महाराज विराज मान थे उनको षाश्टांग प्रणाम किया और बिना कहे और बिना सुने सेवक बालने लगे हे गुरूदेव, हे गुरूदेव आपके मुख में ये छाले पढ रहे हैं अभी अभी स्वामी जी ये वृक्ष की डाल लगने से आपका सिर सूज गया है ये सेवक आकर बताने लगे, गुरूदेव कहने लगे मेरे मुख में छाले पडे़ है ये कैसे भक्त है कि मेरे मुख के छालों का अनुभव इनको कैसे हो रहा है और ये नूतन वृक्ष की डाली लगने से मेरा सिर भारी हो रहा है इनको कैसे ये अनुभव हो रहा है जैसे ही भक्तों ने प्रार्थना की हे गुरूदेव क्या ऐसा हुआ है गुरूदेव भगवान ने कहा हां ऐसा हुआ है छाले मुख में पढे हुये है और ये नूतन वृक्ष की डाली लगने से मेरा सिर भारी हो रहा है ये सुनते ही भक्त के आंखों से आंसू बरसने लगे कहने लगे गुरूदेव, गुरूदेव यह देख करके लेकिन गुरूदेव ने कहा कि तुम लोग अंतरयामी नहीं हो, तुम्हारी इतनी भक्ति है नहीं है कि तुम मेरे अंतःकरण के भावों को पहचान लो। लेकिन हमें लगता है मेरे छालों को जानने वाला मेरी चोट को पहचानने वाला कोई और नहीं है हो न हो कहीं रसिक तुम्हारे गांव में रह रहा है ये भाव तुम्हारा नहीं है सच बोलो झूठ मत बोलना ये भाव किसने बताया है तो कहीं न कहीं तुम्हारे गांव में रसिक मेरा रह रहा है उसने बताया है तो सेवक बोले गुरूदेव ये सत्य है सत्य है, आपके महा विरह में श्री रसिक देव जी महाराज तडपते रहते हैं रोते रहते है हरपल हरक्षण गुरूदेव गुरूदेव का स्मरण करते रहते हैं गुरूनाम की माला करते रहते हैं मैने ऐसी निश्ठा जीवन में किसी के भीतर नहीं देखी जैसा प्रेम जैसा भाव जैसी प्रबल निश्ठा हे गुरूदेव आपके चरण कमलों में मेरे रसिक देव जी महाराज की आपकी भक्ति है। जब सेवकों ने ये बात निवेदित की तो आप फिर बिगड़ गये बोले अच्छा इस गांव में मेरा रसिक रह रहा है तो मेरी आज्ञा है तुम मेरे षिश्य हो तो जाकर के रसिक देव को कहना कि ये बुंदेलखण्ड को छोडकर के चला जाए। ये अंतिम परीक्षा है ये सुनकर के सेवकों नेत्रों से आंसू गिरने लगे शरीर भी कांप गया गुरुदेव ऐसी कठिन परीक्षा इतनी कठिन परीक्षा आप उनको यहां से निकाल रहे हैं गुरूदेव ऐसा न करें ऐसा प्रेम ऐसी भक्ति मैने दूसरे के हृदय में नहीं देखी अनंत से भी अनंत प्रेम आपके प्रति है गुरुदेव ऐसा न करें। बार-बार शिष्यों ने आग्रह किया है जब आग्रह किया है तो आपने कहा अच्छा तुम लोग सिफारिश कर रहे हो तो ठीक है लेकिन मेरी ये खबर वहां उनको सुना देना। ठीक है उनको बुंदेलखण्ड से मत निकालो उनको जाकर के कह दो चार ब्राह्मणों को भेजा है और ब्राम्हणों को जाकर समाचार दे दो फतेहपुर ग्राम में श्री गुरुदेव भगवान विराजमान है तो श्री रसिक देव चाहें तो आ जायें यह जाकर के समाचार शिष्यों ने रसिक देव जी महाराज को दिया है और यह सुनकर के आप गुरूचरणों मे आ गये तत्काल सुनते ही शास्टांग वंदन किया है और गुरूदेव ने सेवा में लगा लिया और आप सेवा करने लगे एक दिन सेवा करते करते बहुत काल बिता है आप बुंदेलखंड में ही उस काल विराजमान थे और उसी समय एक दिन की बात है पुनः श्री केशवदास जी ने गुरूदेव से शिकायत फिर कर दी एक बार रसिक देव जी सेवा में आ गये है दुबारा फिर शिकायत कर दी। गुरुदेव भगवान आपके रसिक देव जी महाराज को अपनी सेवा में रख तो लिया है ये जान बूझ कर परीक्षा ली जा रही है रसिक देव जी महाराज की केशर दास जी महाराज ने कहा कि गुरूदेव मैने इनके पास जहर की पोटरी देखी है ये रसिक देव जी महाराज की आखिरी परीक्षा थी ऐसी परीक्षा गुरूदेव जी महाराज अपने सेवकों की निरंतर लेते रहते है। आज की कथा में श्री राधाकृष्ण जी महाराज श्रीधाम वृंदावन, ज्योतिष सम्राट राम नारायण पटैरिया मिर्जापुर, वृजेश जी महाराज मगरौन, ने व्यास पीठ पर गुरूजी को माल्यार्पण कर व्यास पीठ से आषीर्वाद लिया। आज की कथा की आरती में लखन पटेल, राज्यमंत्री, प्रेम नारायण दुबे, श्रीमति साधना अजय दुबे, श्रीमति प्रतिभा डाॅ. अनिल तिवारी, श्रीमति अभिलाषा अंकित दुबे, अभिशेक भार्गव, अनुराग प्यासी, संजीव दुबे, मुन्ना चैबे, अनिल दुबे, गौर गोपाल पांडेय, राघवेन्द्र नायक, मुरारी नायक, गोलू अग्रवाल, अमित मिश्रा, प्रभात मिश्रा, अंकुर नायक, आदित्य पांडेय, रूपेश विष्वकर्मा, शिवम् दुबे, अतुल तिवारी, सचिन पंडा, निशांत दुबे, विवेक मिश्रा, कुलदीप सोनी, सुनील मिश्रा, विटटू सोनी, प्रमोद उपाध्याय, विनय मिश्रा, महेश नायक बीना, प्रेमनारायण रावत बीना, गिरीशकांत तिवारी, अंकित दीक्षित सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बंधुओं ने कथा में आरती एवं व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया।
सुबह 10 बजे से 12 बजे तक गुरू दीक्षा का कार्यक्रम नित्य नियम से कार्यक्रम चल रहा है प्रतिदिन बड़ी संख्या में पूज्य गुरूजी से गुरूदीक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्री गोपालमहायज्ञ सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक विद्वान पंडितों द्वारा कराया जा रहा है जिसमें यज्ञ के यजमान हजारों आहूतियां छोड रहे हैं यज्ञ में विराजमान अमृतलाल मिश्रा, अनुराग प्यासी, अनिल नायक, महेश दुबे, उमेश मिश्रा प्रतिदिन यज्ञ में आहूतियां दे रहे हैं।
