
सुरेन्द्र जैन मालथौन।
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के अवतरण दिवस पर आर्यिका श्री सूत्रमती माताजी संसघ के सानिध्य में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव कार्यक्रम बड़े उत्साह पूर्वक उपकार दिवस के रूप में मनाया गया।इस अवसर पर अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम हुए। धर्म सभा को आर्यिका श्री सूत्रमती माताजी ने
धर्मदेशना में कहा कि हम सौभाग्य शाली है गुरुवर के युग के जन्म लिया है। गुरुजी ने क्या दिया यह कहने की बात नहीं है उन्होंने क्या नहीं दिया।
गुरुवर आठ बर्ष की उम्र अणुवर्ती हो गए थे ,अहिंसा के सागर के कहने को विद्यासागर थे ,गुण थे ,सत्य के महासागर थे।ऐसे गुरुवर शरद पूर्णिमा को जन्मे। दोनों आचार्यो का पूर्णमा को अवतरण हुआ ,आज हम उनका उपकार दिवस मना रहे हैं। आचार्य श्री ने समाज की उन्नित और देश के कल्याण के लिए ,पांच सूत्र दिए ,ये जन जन के संत हैं।किसी भगवान को देखा नहीं चलते फिर भगवान के समान ऐसे गुरुवर संत देखे ,जो देश समाज की कल्याण की चिंता करते थे।
दोपहर में आर्यिका श्री ससंघ के सानिध्य में माता पिता सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ,विधायक भूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि के रूप में उनके पुत्र युवा भाजपा नेता अविराज सिंह शामिल हुए ,उन्होंने आचार्य विद्यासागर जी महाराज को नमन करते हुए आर्यिका श्री संसघ श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर अविराज सिंह ने विचार प्रकट करते हुए कहा कि विश्व का सर्वश्रेष्ठ धर्म अहिंसा परमो धर्म हैं जैन धर्म तपस्या ,त्याग ,शुद्धि ,आदर्श आचरण का प्रतीक है जैन धर्म ने विश्व को संदेश दिया है क्षमा वीरस्य भूषणम ,क्षमा वीरों का आभूषण है। राष्ट्र में कोई सेवा कार्य हो जैन समाज हमेशा में अग्रणी रहता हैं। देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अंग है। मेने हमेशा माना है कि जैन समाज आगे बढ़ाने में जितना समाज वृद्धों का हैं उतना ही समाज की मातृशक्ति हैं। आज आचार्य श्री विद्यासागर जी और आचार्य समय सागर जी महाराज का जन्म जयंती है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने संदेश दिया था तीन चीजों को अपनाना है स्वदेशी ,स्वभाषा और स्वभूषा को अपनाना है। अपने राष्ट्र के बने पदार्थो ,सामग्रियों का उपयोग करना ,स्वभाषा यानी गर्व से हिंदी भाषा बोलना ,गर्व से इंडिया नहीं भरता बोलना। क्योंकि राष्ट्र का नाम भारत है। गर्व से हमे अपने बच्चों को मातृभाषा और अच्छे संस्कार सिखाना हैं। स्वभूषा यानी खादी के बने वस्त्रों का उपयोग ,भारतीय बेषभूषा को उपयोग करें। मेरी उम्र 22 साल है। आचार्य श्री ने 22 बर्ष की उम्र में मुनि दीक्षा ग्रहण कर ली थी ।उसके बाद उन्होंने सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र की सेवा में समपर्ण कर दिया। आदर्श जीवन का सूत्र कैसा हो उनके प्रवचन ,और किताबो को पढ़ा है। यह सूत्र हर धर्म का व्यकिती अपना सकता हैं हमने आचार्य श्री की प्रेरणा से अहिंसा के उपदेश को अपना लिया हैं। आखिर जैन धर्म मे ही ये कल्पना की है शेर और गाय एक तट पर पानी पिये।ऐसा समय आये अहिंसा का सपना पूरा हो। आज पूरे विश्व ,वैश्विक समस्याएं चल रही हैं आपस में लड़ाई मची हुई टकराव है। लेकिन अपने राष्ट्र में स्थिरता हैं जिसका कारण है भारत के महापुरुषों और पूर्वजो ने अहिंसा से देश को आगे बढ़ाया हैं। आज समाज ने माता पिता का सम्मान कार्यक्रम किया है।हमारा जब जन्म होता है पत्थर के समान होता है माता पिता ही उस पत्थर को तराशकर एक मूर्ति बनाते है उन्हें अच्छे संस्कार देकर एक अच्छे व्यकिती बनाती हैं। इस अवसर पर समाज के प्रमुखजनो द्वारा युवा भाजपा नेता अविराज सिंह का भव्यता से सम्मान किया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी योगेश भैया ,बारे लाल कठरया , सुबोध सतभैया ,संतोष चौधरी , भाजपा मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह लोधी ,गिरीश पटैरिया , सिरनाम सिंह तोमर ,दुर्ग सिंहः परिहार ,वीर सिंह यादव ,भीकम सिंह यादव ,मन्नू लाल जैन ,आशा देवेंद्र जैन ,पुष्पेंद्र सिंह परिहार , हाकम सिंह राजपूत , ,गिन्नी राजा तोमर ,हीरू सिंह सहित सकल जैन समाज उपस्थित रही ।
