
अदम्य साहस की वीर गाथा लिख गई वीरांगना रानी दुर्गावती
रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस विशेष – युवाओं ने कहा कि आत्मनिर्भर और रक्षा के लिए प्रेरणादायक है वीरांगना के कार्य
विशाल रजक तेंदूखेड़ा!
भारत की महान वीरांगनाओं में से रानी दुर्गावती भी एक थीं जो दूरदर्शी, कुशल योद्धा, बेहद सुंदर, अर्थशास्त्री और स्वाभिमान से जीने वाली वीरांगना थीं। जो आज भी इतिहास के जानने वालों के बीच रोचक है। उनकी वीरगाथा को मिसाल के रूप में देखते हैं। दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को हुआ था। महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं। वे दुनिया की कुछ बेहतरीन रानियों में से रानी दुर्गावती एक थी, जो बेहद सुंदर थीं और एक कुशल योद्धा भी थीं। उन्होंने अपने 17 साल के शासन के दौरान यह भी साबित कर दिया था कि वह एक अच्छी अर्थशास्त्री थीं। उनकी सोच विकास वाली थी, उस दौरान पूरे गोंडवाना साम्राज्य में लोग सुख और शांति के साथ रह रहे थे
मुगल सेना से लिया लोहा
रानी दुर्गावती ने मुगल सेना का डटकर सामना किया और एक-एक को मारते हुए आगे बढ़ती गईं। लेकिन इस बीच उनका पुत्र और उनकी सहेली वीरगति को प्राप्त हो गई। अपना सबकुछ खो चुकी रानी से यह सहा नहीं गया। उन्हें चक्कर आ गया। तभी एक तीर उनकी आंखों में लगा तथा दूसरी उनकी गर्दन में इस तरह रानी भी वीरगति को प्राप्त हुई जबलपुर गढ़ा से पांच कोस दूर आज भी रानी दुर्गावती की समाधि है
शौर्य प्रतिभा बचपन से दिखने लगी
प्रदेश संगठन मंत्री जयस श्रीकांत पोरते का कहना है कि रानी दुर्गावती, एक ऐसा नाम, जिनकी गिनती भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध रानियों में होती है खून का असर तो बचपन से ही रानी दुर्गावती में था घोड़े का शौक, हथियार चलाने का शौक, तैराकी करने का शौक बचपन से ही उनके अंदर था उनकी प्रतिभा तो बचपन से ही दिखने लगी थी
श्रीकांत पोरते तेंदूखेड़ा
गोंडवाना को मिला कुशल शासक
राहुल परस्ते बताते हैं कि रानी दुर्गावती ऐसी विलक्षण, साहसी एवं कर्मयोद्धा हैं जिन्हें उनके बलिदान, स्वाभिमान और वीरता के साथ गोंडवाना के एक कुशल शासक के तौर पर याद किया जाता है
राहुल परस्ते तेंदूखेड़ा
सुंदरता और शौर्य की मूर्ति
राहुल ठाकुर कहते हैं कि रानी दुर्गावती नाम के अनुरूप ही अपने तेज, साहस, शौर्य और सुंदरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर थी दुर्गावती के वीरतापूर्ण चरित्र को भारतीय इतिहास आज भी याद करता है
राहुल ठाकुर तेंदूखेड़ा
स्वतंत्र पहचान बनाई
भरत रजक बताते हैं कि भारतीय इतिहास में उनके योगदान को कभी भी भूला नहीं जा सकता। इतिहास गवाह है कि रानी दुर्गावती ने अपनी बहादुरी और साहस का प्रयोग कर स्वतंत्र पहचान कायम की
भरत रजक तेंदूखेड़ा
महिलाओं को शिक्षिका किया
गुड़िया ठाकुर ने कहा कि रानी दुर्गावती ने महिलाओं को शिक्षित करने का प्रयास किया और उनके लिए लाख के आभूषणों के लघु उद्योग स्थापित कराए चिरौंजी, सिंघाड़ा, महुआ एवं इमारती लकड़ी के व्यापार को प्राथमिकता दी साथ ही शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा देने के उद्देश्य से पचमठा में गुरुकुल स्थापित कराया था जड़ी बूटियों से बनी औषधियों के व्यापार को भी बढ़ावा दिया
गुड़िया ठाकुर तेंदूखेड़ा
जड़ी बूटियों से औषधि तैयार कराया
रानी गौड़ ठाकुर ने कहा कि गोंडवाना काल में मोटा अनाज, वस्त्र उद्योग, काष्ठ उद्योग, जड़ी बूटियों से तैयार औषधि उद्योग और शस्त्र उद्योग को बढ़ावा दिया गया गोंडवाना साम्राज्य में राजनैतिक सामाजिक आर्थिक धार्मिक सांस्कृतिक कला एवं साहित्य के क्षेत्र में सुव्यवस्थित रूप से उन्होंने कई काम किए
रानी गौड़ ठाकुर तेंदूखेड़ा
