

शक्ति रूपेण संस्थिता…..
चट्टानों के बीच विराजीं नौ रूपों में मां अनगढ़देवी
दिवाकर वर्मा, बांदरी। सागर-झांसी फोरलेन नेशनल हाइवे 44 पर स्थित गढ़पहरा के इस मंदिर में मां अनगढ़ देवी प्राकृतिक चट्टानों के बीच विराजमान हैं। चैत्र नवरात्र पर पूजन करने के लिए यहां प्रतिदिन दूर-दराज क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर विश्राम करने के लिए सामुदायिक भवन भी बनवाया गया है। यह प्राचीनतम मंदिर जहां स्थित है वहां पूर्व में घना जंगल था, जो अब समाप्त हो गया है। लेकिन मंदिर की खूबसूरती एवं सुन्दरता में कोई कमी नहीं आई है। अनगढ़ देवी का यह मंदिर मनमोहक दृश्यों और मनोरम नजारों के लिए प्रसिद्ध है। शांत वातावरण के साथ-साथ, यह शोरगुल से दूर, चिंताओं, तनावों और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए एक स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है। बुंदेलखंड क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में शामिल गढ़पहरा धाम की पहाड़ी पर विराजमान मां अनगढ़ देवी मंदिर जाने का रास्ता सुगम हो गया है। इस मंदिर का इतिहास गौड़ शासक संग्राम सिंह के समय से माना जाता है। मां अनगढ़ देवी के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्हें मां के दर्शन करने पहले पथरीले रास्ते से जाना होता था, लेकिन अब उनका रास्ता सुगम हो गया है। बताते हैं कि इसी मंदिर से एक रहस्मयी गुफा है जिसका गुप्त मार्ग मेहर की हिंगलाज देवी तक जाता है।
प्राकृतिक चट्टानों को तराश कर बनाया मंदिर : यहां जाने से पूर्व श्रद्धालु पहले हनुमान जी के दर्शन करते हैं। अनगढ़ देवी के बारे में मान्यता है कि यहां आने वाली महिलाओंकी यदि गोद सूनी है तो जरूर भर जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां मंदिर में बिराजी मां अनगढ़देवी के दर्शन करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। मां अनगढ़देवी का यह प्राचीन व ऐतिहासिक मंदिर को चट्टानों को तराश कर बनाया गया है। इसके बाद इस मंदिर में नव देवियों की स्थापना की गई है। चारों ओर से पहाडियों की आगोश में बसे इस स्थान पर आते ही भक्त अपने अंदर अंतर महसूस करने लगते हैं। यहां आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आकर सिद्ध कुंजिका स्रोत, दुर्गा सप्तसती, दुर्गा सहस्त्रनाम आदि का पाठ करता है उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती है। पं. दीपक महाराज ने बताया कि मंदिर के चारों तरफ सैकड़ों एकड़ में गुफाओं की विस्तृत श्रृंखला है। यहां आने वाले लोगों के लिए यह गुफाएं कौतूहल का केन्द्र रहती हैं। मां के दरबार में आने वाले भक्तों का विश्वास है कि यहां कभी भी कोई भी भक्त आकर अपनी प्रार्थना मां से कर सकता है। मां के दरबार में आकर कोई व्यक्ति यदि कोई भी सद्मार्ग पर चलने का संकल्प पूरी निष्ठा से लेता है तो शीध्र उसके जीवन की राह आसान होने लगती है।
