
सच्ची मित्रता करना सिखाती है भगवान की कृष्ण सुदामा लीला – चिन्मयानंद बापूू
सच्ची मित्रता करना सिखाती है भगवान की कृष्ण सुदामा लीला खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में चल रही है। श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन परम पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू जी ने कहा कि विवाह के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका में अनेकों लीला की साथ ही साथ बहुत से भक्तों पर अपनी कृपा बरसाए बापूजी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा जो कि अत्यधिक निर्धन थे लेकिन श्रीकृष्ण के नाम का बहुत सारा धन उनके पास था कभी किसी के पास उन्होंने जाकर किसी भी प्रकार की याचना नहीं की और उनके इसी स्वभाव से प्रसन्न होकर भगवान ने उनको धरती और स्वर्ग में रहने वाले राजाओं को जो सुख मिलता है वह सुख प्रदान किया भगवान के बचपन के मित्र सुदामा पर कृपा करके भगवान ने मानो यह संदेश दिया की मित्र के दुख को देखकर अपने पहाड़ जैसे दुख को भी भूल कर मित्र की सहायता करना ही सच्ची मित्रता कहलाता है मित्रता वह नहीं है जो हमें गलत आदतों में डालें बुरी संगत ओं में डालें इसलिए मित्र भी बनाओ तो बड़े ही सोच समझकर और जो तुम्हें ऊंचाइयों का रास्ता दिखाएं वही सच्चा मित्र है बाद में भागवत कथा को परीक्षित मोक्ष की तरफ मोड़ते हुए कहां की सात दिनों तक कथा सुनने के बाद जब सुखदेव जी द्वारा परीक्षित से पूछा गया कि यदि तुम्हें तक्षक नाग डसेगा तो क्या तुम मरोगे तब राजा परीक्षित ने कहा कि हे भगवान मैं तो श्रीमद् भागवत कथा सुन के मुक्त हो गया हूं अब तो यह शरीर जो नश्वर है वही नष्ट होगा मैं तो भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनकर स्वता ही मुक्त हो गया हूं और बाद में राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाते हुए भागवत कथा को विराम किया गया बापूजी के सात दिनों के सानिध्य पाने के बाद समस्त आयोजन समिति और श्रद्धालु भक्त भाव विभोर थे और पूरा पंडाल श्रोताओं से भरा हुआ था और नम आंखों से बापू को भावभीनी विदाई सभी ने समर्पित की
आज की कथा में पूर्व केबिनेट मंत्री व रहली विधायक पंडित श्री गोपाल भार्गव जी, सागर संभाग प्रभारी श्री गौरव रणदेवे जी, नगर विधायक श्रीमति अनुश्री शैलेन्द्र जैन, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री श्याम तिवारी, कुलाधिपति डाॅ. अजय तिवारी जी ने पूज्य बापू जी का शाॅल श्रीफल भेंट कर व पुश्पमाला पहनाकर बापू जी से आषीर्वाद लिया एवं देर समय तक कथा श्रवण की।
आज मुख्य रूप से कथा में मुख्य यजमान श्रीमती प्रतिभा डाॅ.अनिल तिवारी, डाॅ. अजय तिवारी, शिवशंकर मिश्रा, मुख्य सह यजमान श्रीमती शिल्पा तिवारी नीरज तिवारी और सह यजमान के रूप में अजय श्रीवास्तव, रत्नेश राजपूत, राजकुमार अग्निहोत्री, अमित रामजी दुबे, गोलू रिछारिया, तरुण बडोनिया, अनिल दुबे, अशोक उपाध्याय, असंख्य दुबे, डाॅ. अंकलेश्वर दुबे, पप्पू तिवारी, रविन्द्र अवस्थी, राजीव हजारी, अतुल मिश्रा, षिवा पुरोहित, दिलीप बाबू, प्रहलाद रैकवार, षिव प्रसाद तिवारी, निहिल मिश्रा, नमन मिश्रा, अंकित दीक्षित, शारदा खटीक, आजादरानी खटीक, लालू मेठवानी, रामअवतार पांडे, मुकेश नायक, राहुल समेले, कमल तिवारी, मुन्ना पटेरिया, सीताराम मिश्रा सहित असंख्य श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की। आज कथा के समापन पर पूज्य बापू जी ने समस्त श्रद्धालुआकें के बीच जाकर उन्हें दर्षन लाभ दिया श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बापू जी का जोरदार व भव्य स्वागत किया। सभी श्रद्धालुओं की इस अवसर पर आॅखें नम हो गईं। बापू जी के जयकारों से पूरा कथा स्थल व पण्डाल गुंजायमान हो गया।
