
राहतगढ़ के श्री गणेश जिन्हें चढ़ाया जाता है सिंदूर
धर्मेंद्र सिंह राजपूत राहतगढ़
सागर | जिले से 40 किलोमीटर दूर भोपाल मार्ग पर राहतगढ़ के पास सुप्रसिद्ध वाटरफॉल में भगवान गणपति जी की एक ऐसी प्रतिमा है जिन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है | वैसा माना जाता है कि सिंदूर चोला हनुमान जी का विशेष श्रृंगार है और वह हनुमान जी की गतिमा पर चढ़ाया जाता है | दरसल यह गणपति जी की प्रतिमा बहुत पुरानी बताई जाती है | बुजुर्ग बताते है यह प्रतिमा 1800 शताब्दी किले की समय की प्रतिमा है उसी समय की लघेरा धाम की प्रतिमा और वॉटरफॉल में बीच धार में विराजमान भीमसेन जी और भगवान गणपति लगभग एक ही समय के बताए जाते है | यह प्रतिमा बड़ी अनोखी और अनूठी है प्रतिमा की लंबाई लगभग 8 फीट होगी जो नृत्य मुद्रा में विराजमान है भगवान गणपति के सामने पिता भोलेनाथ बैठे हैं जिनकी आराधना गणपति जी करते हैं | हाथ में गधा लिए हैं आजू-बाजू में रिद्धि सिद्धि है और भी कई कलाकृति पत्थर पर उकेरी गई है मंदिर के बाजू में सती माता का भी शिलालेख है साथ ही अन्य देवताओं की प्रतिमाएं भी है जो खंडित रूप में पड़ी हुई है जानकारी के अनुसार वर्षों पहले क्षेत्र का नाम पाटन था | जहां पर हीरे जवाहारात के बाजार लगा करते थे तत्कालीन समाज सेवक बैजनाथ मुंशी जी ने प्रतिमा के पास एक चबूतरा का निर्माण करवाया था और उस समय से दीपावली की ग्यारस के बाद 11 दिन का मेला लगने लगा इस मंदिर पर अनेकों लोग आते हैं पूजा अर्चना करते हैं प्रसाद चढ़ाते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर यहां भंडारा भी करवाते है | नगर के समाजसेवी बृजभूषण चौरसिया और उनके साथियों ने मिलकर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जो आज एक देखने में सुंदर और अच्छा मनोहरी लगता है जहां लोग जाकर बैठकर भजन कीर्तन भी करते है वैसे तो लोग यहां 12 महीना आते जाते हैं लेकिन गणपति जी के समय पर यहां लोगों का आना-जाना अधिक हो जाता है | मंदिर में पूजा करने वाले पंडित बाला प्रसाद शर्मा ने बताया कि मैं कई वर्षों से यहां पूजा कर रहा हूं | गणपति जी को सिंदूर क्यों जाता है यह तो मैं भी नहीं बता सकता लेकिन मैं बचपन से देखता रहा हूं कि गणपति जी की प्रतिमा को सिंदूर चोला चढ़ाया जाता है | यह बहुत सिद्ध स्थान है यहां पर हजारों लोगों की मनोकामना पूर्ण हुई है |
