भगवान कहते हैं, भाव ही प्रधान है उपासना का भाव ही भक्ति है
श्री भक्तमाल कथा के तृतीय दिवस में स्वामी महंत परम पूज्य श्री श्री 108 श्री किशोर दास देव जू महाराज श्री गोरेलाल कुंज श्रीधाम वृन्दावन बिना भक्तमाल भक्ति अधिक दूर है जिनके हृदय में भक्ति महारानी विराजमान हैं उन्हीं के पास श्री ठाकुर जी हैं। भगवान कहते हैं, भाव ही प्रधान है। उपासना का भाव…
