
महिला किसान वर्ष में डाॅ0 प्रतिभा तिवारी जी ने किया गहन, सर्वेक्षण एवं साक्षात्कार
सगर | 18 मार्च को भारतीय स्त्रीशक्ति मध्यप्रदेश के द्वारा सागर के महुआ खेड़ा, भापेल, पदउआ में “महिला किसान वर्ष” में भारतीय स्त्री शक्ति मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष-डाॅ0 प्रतिभा तिवारी ने गहन, सर्वेक्षण एवं साक्षात्कार किया जिसमें सागर के मनक्यायी श्रीमती मीना पटेल आपने ने बताया कि – अक्सर खेती में पुरुषों का नाम पहले आता है, लेकिन आज हम महिलाऐं मिलकर कृषि उद्यमियों से मिट्टी से सोना उगाकर न केवल अपना घर चलाया, बल्कि समाज में एक नई पहचान बनाई है। खेती से होने वाली कमाई ने हमारी जीवन स्तर को बदला है क्या अब हम अपने बच्चों की पढ़ाई और घर के फैसलों में खुद निर्णय ले पाते है। श्रीमती रेखा रानी पटेल ने बताया कि-आज हम महिलाएं मिल कर यह साबित कर रही हैं कि खेती सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वाभिमान से जीने का रास्ता भी है। जैसी हजारों महिलाएं आज ग्रामीण भारत की नई इबारत लिख रही हैं। खेती किसानी करके अपना जीवन यापन कर रही है। महिलाएं अब हर क्षेत्र में जागरूक हो रही है और अत्मनिर्भर बन रही है। श्रीमती बबली पटेल ने बताया कि – आज के समय में ग्रामीण भारत की महिलाएं खेती-किसानी के जरिए न केवल अपना घर चला रही हैं, बल्कि लाखों का कारोबार भी कर रही हैं। चाहे वो मशरूम की खेती हो, जैविक खेती हो या आधुनिक तकनीक, ये महिलाएं आज असली कृषि उद्यमी बनकर उभरी हैं। महुआ खेड़ा की श्रीमती सावित्री विष्वकर्मा और भापेल की श्रीमती सीता ठाकुर ने बताया कि – खेती अब सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, मुनाफा कमाने का बिज़नेस है। पहले महिलाएं खेती में सिर्फ मददगार थीं, लेकिन अब वे निर्णय लेने वाली हैं। अब महिलाओं के अपने बैंक खाते हैं। वे फसल बेचकर सीधे अपने खाते में पैसे प्राप्त कर रही हैं। यह जीवन यापन के स्तर में आए सुधार को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है। सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय महिलाएं अब मिश्रित खेती कर रही हैं ताकि गुजारा कभी न रुके। जीवन यापन का मतलब सिर्फ पैसा नहीं, सम्मान भी है। उन्हें अब किसान के रूप में सरकारी पहचान मिल रही है, जो पहले सिर्फ पुरुषों तक सीमित थी। इसमें नगर अध्यक्ष-डाॅ. प्रज्ञा उपाध्यय जी का भी सहयोग रहा। इसमें श्रीमती सुलोचना तिवारी, श्रीमती ज्योति सेन भी उपस्थित रही।
