भगवान श्री कृष्ण ने सांदीपनि मुनि के आश्रम में सीखी थीं 64 कलाएं- अविराज सिंह

भगवान श्री कृष्ण ने सांदीपनि मुनि के आश्रम में सीखी थीं 64 कलाएं- अविराज सिंह

सागर। एडीना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा महाकवि पद्माकर सभागार में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना देश की युवा शक्ति ही साकार करेगी। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति आने वाले समय में राष्ट्र को आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। अविराज सिंह ने कहा कि युवा होने का अर्थ केवल आयु नहीं, बल्कि अपने हुनर पर भरोसा, अपनी मिट्टी पर गर्व और अपनी मेहनत पर विश्वास होना है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अनुशासित, जागरूक और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

अविराज सिंह ने कहा कि युवा अवस्था में किया गया परिश्रम ही भविष्य में सफलता और सम्मान का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि आज का समय युवाओं के लिए अमृतकाल है, जहाँ अवसरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलेगी जो अनुशासन, निरंतर सीखने की आदत और मेहनत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा वह है जो अनीति से लड़ता है, दुर्गुणों से दूर रहता है, समस्याओं का समाधान खोजता है और केवल बातें नहीं, बल्कि करके दिखाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने भी विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि युवा ही इसके अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और कई बार दर्शक भी होंगे। अविराज सिंह ने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाला बनना होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ‘जेन-जी’ का युग है, जो तकनीक और डिजिटल दुनिया के साथ बड़ी हुई पीढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी यह पीढ़ी ‘डिजिटल नेटिव’ कहलाती है, क्योंकि इसने बचपन से इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया को बेहद करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि भारत में जेन-जी की आबादी लगभग 37.7 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यह वर्ग उपभोक्ता खर्च का लगभग 43 प्रतिशत नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी युवा शक्ति यदि नवाचार, स्टार्टअप, शोध और तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़े तो भारत को विश्व नेतृत्व से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि जेन-जी को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार और परिवर्तन का प्रतीक बनना होगा।

अविराज सिंह ने कहा कि आज की दुनिया में केवल डिग्री सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने और स्वयं को अपडेट रखने की क्षमता ही युवाओं को आगे ले जाएगी। उन्होंने कहा कि डिग्री आपको इंटरव्यू की मेज तक पहुँचा सकती है, लेकिन आपकी मेहनत, कौशल और ‘अपस्किलिंग’ ही आपको सफलता के शिखर तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान हर दो से तीन वर्ष में बदल रहा है और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार भविष्य की लगभग 50 प्रतिशत नौकरियों के लिए नए कौशलों की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को बदलती दुनिया के साथ स्वयं को भी बदलना होगा और नई तकनीकों, डिजिटल स्किल्स तथा उद्यमिता को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और हजारों युवा अपनी प्रतिभा के दम पर वैश्विक पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में छोटे स्तर से शुरुआत कर वैश्विक कंपनी खड़ी कर दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोटेक, डिफेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, ई-कॉमर्स, टेलीकॉम, फार्मा, बैंकिंग, फिनटेक और एडटेक जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक अवसर बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन युवाओं का होगा जो ‘इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस और प्रॉस्पर’ के मंत्र को अपनाएंगे।

अविराज सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका उपयोग केवल दूसरों को देखने या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सृजन और सकारात्मक बदलाव के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर अभिनेता बनने की कोशिश कर रहा है और लोग वास्तविक जीवन जीने की बजाय दूसरों की स्वीकृति पाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है, जो सही उपयोग होने पर युवाओं को वैश्विक पहचान दिला सकता है, लेकिन गलत उपयोग होने पर यह मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी का कारण भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान, नवाचार, शिक्षा और सकारात्मक कंटेंट निर्माण के लिए करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज फिल्मों और सोशल मीडिया के माध्यम से नशे को ‘स्टाइल स्टेटमेंट’ और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो युवाओं के लिए अत्यंत खतरनाक प्रवृत्ति है।

उन्होंने कहा कि खाली दिमाग बहुत जल्दी नशे की ओर आकर्षित होता है, इसलिए युवाओं को अपनी ऊर्जा खेल, संगीत, लेखन, पेंटिंग, कोडिंग और समाज सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब युवा अपने जुनून और लक्ष्य पर केंद्रित होता है, तब जीवन में नशे और विनाशकारी आदतों के लिए कोई स्थान नहीं बचता। उन्होंने कहा कि असली हीरो वह नहीं है जो धुएँ और दिखावे में जीता है, बल्कि वह है जो अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

अविराज सिंह ने कहा कि युवाओं को सफल लोगों की जीवनी और आत्मकथाएँ अवश्य पढ़नी चाहिए, क्योंकि महान व्यक्तियों के संघर्ष और सफलता की कहानियाँ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र आत्ममूल्यांकन है और प्रत्येक युवा को प्रतिदिन स्वयं का आकलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में असफलता मिलती है तो उसे अंत नहीं मानना चाहिए, क्योंकि कई बार ईश्वर हमें उससे भी बड़े उद्देश्य के लिए तैयार कर रहा होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी युवा अवस्था में सांदीपनि मुनि के आश्रम में रहकर 64 कलाओं का अध्ययन किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि युवा अवस्था केवल सुख भोगने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं को निखारने और महान उद्देश्य के लिए तैयार करने का समय है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा का सही प्रबंधन सीखना होगा और यह समझना होगा कि समय, क्षमता और प्रतिभा का उपयोग कहाँ और कैसे करना है। उन्होंने कहा कि जीवन में वही व्यक्ति आगे बढ़ता है जो समय का महत्व समझता है और आज के काम को कल पर नहीं टालता। उन्होंने कहा कि इस विस्तृत अध्ययन और अनुभव का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि युवाओं को बाहरी दुनिया को जीतने से पहले अपने मन पर विजय प्राप्त करनी होगी। उन्होंने कहा कि चरित्र का निर्माण सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का वास्तविक व्यक्तित्व भी राजमहल में नहीं, बल्कि 14 वर्षों के वनवास के दौरान निखरकर सामने आया था। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए भी स्वयं को समर्पित करें।

कार्यक्रम में एडीना मैनेजमेंट के डॉ. सुनील कुमार जैन डायरेक्टर एडीना, राजेश जैन चेयरमैन, रोहित जैन एसोसिएट डायरेक्टर, सुयश जैन, प्रिंसीपल इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रिंसीपल फार्मेसी कॉलेज और समस्त कर्मचारी व स्टूडेंट उपस्थिति रहे |

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