
निःशुल्क बुंदेली लोक नृत्य एवं नाट्य कला कार्यशाला शुरू
भारतीय लोक संस्कृति, परंपरा एवं ग्रामीण सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से बुंदेली लोक नृत्य व नाट्य कला परिषद, कनेरा देव सागर (मध्यप्रदेश) द्वारा आज दिनांक 10 मई 2026 को पद्मश्री पं. रामसहाय पांडे गुरुकुल भवन, शिव धाम बाघराज वार्ड, सागर में 15 दिवसीय निःशुल्क बुंदेली लोक नृत्य एवं नाट्य कला कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया।
यह कार्यशाला भारतीय लोक कलाओं के संरक्षण एवं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संस्था द्वारा वर्षों से लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने हेतु सतत कार्य किया जा रहा है, जो भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय की लोक कला संरक्षण एवं सांस्कृतिक विरासत संवर्धन की भावना को सशक्त रूप से आगे बढ़ाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री श्याम तिवारी जी, जिला अध्यक्ष सागर रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्माननीय डॉ. पी. एस. ठाकुर (चेतन हॉस्पिटल सागर), डॉ. बीरेंद्र पाठक, देवी सिंह राजपूत, उमाकांत मिश्रा, प्रदीप कुर्मी, हेमंत साहू, सुदामा सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं लोक कला के महान साधक पद्मश्री पं. रामसहाय पांडे जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पं. रामसहाय पांडे जी के लोक संस्कृति संरक्षण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक कला भारत की आत्मा है और इसे संरक्षित रखना हम सभी का सांस्कृतिक दायित्व है।
अतिथियों ने संस्था द्वारा ग्रामीण एवं लोक कलाकारों को मंच प्रदान करने, युवा पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने तथा बुंदेली लोक नृत्य, लोकगीत एवं नाट्य विधाओं को जीवंत बनाए रखने हेतु किए जा रहे निरंतर प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की।
संस्था द्वारा आयोजित इस 15 दिवसीय कार्यशाला में बच्चों एवं युवाओं को बुंदेली लोक नृत्य, लोकगीत, लोक वादन एवं नाट्य कला का निःशुल्क प्रशिक्षण अनुभवी कलाकारों एवं प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया जाएगा। कार्यशाला में सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिभागियों को संस्था द्वारा प्रशिक्षण उपरांत प्रमाण पत्र एवं सम्मान प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन हो सके तथा वे लोक कला के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा उन्हें अपनी लोक विरासत से जोड़ना है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकार, छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे। आगामी 15 दिनों तक यह कार्यशाला विविध सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रशिक्षण सत्रों एवं लोक कला प्रस्तुतियों के साथ संचालित की जाएगी।
