
मोदी के 12 वर्ष : सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकसित भारत के संकल्प का स्वर्णिम अध्याय
- भूपेन्द्र सिंह
पूर्व गृह मंत्री , विधायक
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्ष स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी कालखंडों में गिने जाएंगे। वर्ष 2014 में जब उन्होंने देश की बागडोर संभाली, तब भारत नीतिगत जड़ता, भ्रष्टाचार, नेतृत्व संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था। तीन दशक बाद देश को एक स्थिर और स्पष्ट बहुमत वाली सरकार मिली, जिसने शासन की दिशा और कार्यसंस्कृति दोनों को बदल दिया। लगातार तीन लोकसभा चुनावों में प्राप्त जनादेश ने उनके प्रति देश के व्यापक विश्वास को प्रमाणित किया है। 9 जून 2026 को लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिन पूरे कर उन्होंने स्वतंत्र भारत में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का नया कीर्तिमान स्थापित किया। विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में लगातार स्थान, 30 से अधिक देशों द्वारा प्रदान किए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान तथा वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता को रेखांकित करती है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा 5 जून से 21 जून तक चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान के माध्यम से मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का यह उपयुक्त अवसर है, जिससे विकसित भारत के संकल्प और राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं को केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि “प्रधान सेवक” के रूप में प्रस्तुत किया। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” तथा “अंत्योदय” का दर्शन उनकी शासन व्यवस्था की आधारशिला बना। जनभागीदारी, तकनीक आधारित पारदर्शिता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी बनाया गया। जनधन, आधार और मोबाइल आधारित व्यवस्था ने करोड़ों लोगों तक सरकारी लाभ सीधे पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया तथा बिचौलिया संस्कृति पर प्रभावी अंकुश लगाया।
बीते 12 वर्षों में गरीब, किसान, युवा, महिला और वंचित वर्गों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए व्यापक स्तर पर जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। आयुष्मान भारत के माध्यम से लगभग 55 करोड़ पात्र नागरिकों को पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार का सुरक्षा कवच मिला। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.85 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ। उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को गैस कनेक्शन मिले और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई। महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया गया, जिसे स्वतंत्र भारत के महिला सशक्तिकरण के सबसे बड़े निर्णयों में गिना जाएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक विस्तार देखने को मिला। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलित समन्वय स्थापित किया। पिछले वर्षों में अनेक नए एम्स, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई। एमबीबीएस तथा स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थानों, आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू कर सामाजिक न्याय को नई मजबूती प्रदान की गई। स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियानों ने युवाओं के लिए नए अवसर निर्मित किए हैं तथा भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
कृषि, जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि अवसंरचना निवेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश की पहली राष्ट्रीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को धरातल पर उतारना जल प्रबंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की अपेक्षा है।
सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास को समानांतर गति देने की नीति का ही परिणाम है कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों ने देश की आर्थिक संरचना को नई मजबूती प्रदान की है। मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बन चुका है। यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली ने भारत को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान किया है। रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है तथा भारत आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अवसंरचना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लगभग 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2014 के बाद लगभग 90 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण अथवा उन्नयन किया गया है। सड़क निर्माण की गति लगभग 12 किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर 30 किलोमीटर प्रतिदिन से अधिक हो गई है। वंदे भारत ट्रेनों, नमो भारत कॉरिडोर, अमृत भारत स्टेशन योजना, नए हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क विस्तार और आधुनिक परिवहन अवसंरचना ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने अधिक आत्मविश्वासी और निर्णायक दृष्टिकोण अपनाया है। अनुच्छेद 370 और धारा 35ए का निरस्तीकरण, आतंकवाद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णयों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में अपनाई गई प्रभावी रणनीति के परिणामस्वरूप देश नक्सलवाद के संकट से लगभग निर्णायक रूप से बाहर निकल चुका है। एक समय जो क्षेत्र वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, वहां आज विकास, सड़क, शिक्षा और रोजगार की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा, जनजातीय समाज के सम्मान और उत्थान के लिए किए गए प्रयास तथा सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाले अनेक निर्णय इस कालखंड की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। दूसरी ओर अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्विकास, सोमनाथ मंदिर विकास, डॉ. भीमराव आंबेडकर के पंचतीर्थों का विकास, जनजातीय गौरव दिवस की स्थापना तथा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों का निर्माण भारतीय सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करने वाले कदम हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा, कर्तव्य पथ तथा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की प्रतिमा राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक बनकर उभरे हैं। औपनिवेशिक काल के कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू कर न्याय व्यवस्था को भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्परिभाषित करने का प्रयास किया गया है। यह कदम भारतीयता, राष्ट्रीय एकीकरण और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर भारत ने एक आत्मविश्वासी, निर्णायक और विश्वसनीय शक्ति के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक स्वीकृति, “वसुधैव कुटुम्बकम” के संदेश का प्रसार, जी-20 की सफल अध्यक्षता तथा विश्व मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका ने देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। बीते 12 वर्षों की यात्रा को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो यह “संकल्प से सिद्धि” की यात्रा है। यह वह कालखंड है जिसमें भारत ने निराशा से आशा, अस्थिरता से स्थिरता, निर्भरता से आत्मनिर्भरता और संकोच से आत्मविश्वास की ओर निर्णायक कदम बढ़ाए हैं। विकसित भारत-2047 का सपना आज केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है।
