सागर मिनी वृंदावन धाम है और यहां कई स्वरूपों में ठाकुर जी विराजमान हैं : इंद्रेश महाराज

सागर मिनी वृंदावन धाम है और यहां कई स्वरूपों में ठाकुर जी विराजमान हैं : इंद्रेश जी महाराज

सागर। सागर जिला,जिला नहीं बल्कि एक धाम है। हमारे संतों ने कहा है कि सागर मिनी वृंदावन धाम है, जहां कई स्वरूपों में ठाकुर जी विराजमान हैं। यह बात पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने मंगलवार को बालाजी मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा के समापन अवसर पर कही। इस दौरान उन्होंने कई भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर श्रोता झूम उठे। कथा के समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसादी ग्रहण करने भक्तों की कतारें लगी रही।

कथा के समापन अवसर पर सुबह 11 बजे से कथा करते हुए पं. इंद्रेश महाराज ने कहा कि बिहार पंचमी पर हरिदास जी महाराज ने वृंदावन में बांके बिहारी महाराज को प्रगट किया था। इस दिन ही सियाजी रामजी का विवाह हुआ था जिसे यहां विवाह पंचमी भी कहते हैं। उन्होंने भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राजा कंश ने यमुनाजी का शुद्धिकरण, कालिया नाग सहित कई राक्षसों को मारने, इंद्र के प्रकोप से वृंदावनवासियों को बचाने गिरधर उठाने वाले श्रीकृष्ण को उपहार देने के बहाने मथुरा बुलाया था। यह बात जब यहां के लोगों ने सुनी तो पूरे बृजवासी ने श्रीकृष्ण को मथुरा न जाने की प्रार्थना की।

मथुरा पहुंचकर किया कंस बध  

श्रीकृष्ण भी बृजवासियों के प्रेम में आकर कंश बध करने नहीं जा रहे थे, लेकिन नारदजी द्वारा श्रीकृष्ण के स्वप्न में आकर प्रभु से कंश बध सहित 16 हजार विवाह, महाभारत सहित अन्य लीलाओं के विस्तार के लिए उन्हें याद दिलाकर प्रार्थना की तो प्रभु पुरस्कार लेने के बहाने मथुरा पहुंचे। उन्हें मथुरा जाकर देख माता यशौदा सहित सभी बृजवासी और गोपियाें ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह जिद कर मथुरा पहुंचे और हाथी बध, पहलवानों के बध सहित कंश का बध किया। कंश बध के बाद उन्होंने अपने नाना को मथुरा का राजा बना दिया और अपने माता-पिता देवकी और वासुदेवजी को कारागार से मुक्त कराया। बृजवासियों की याद में प्रभु विचलित न हो इसलिए उन्होंने देवकीजी की आज्ञा लेकर मप्र में ही विद्या अध्ययन शुरू किया, जहां पहली बार कृष्ण सुदामा मिलन हुआ था।

जीवन जीने सत्संग आवश्यक

पं. इंद्रेश महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कहते हैं कि जीवन जीने सत्संग आवश्यक है, लेकिन उस समय यदुवंशी सत्संग नहीं करते थे बल्कि कहते थे कि श्रीकृष्ण हमारे रिश्तेदार हैं, हमारे दोस्त है तो हमें क्या होगा। भगवान उनसे कहते थे सत्संग मत छोड़ों, लेकिन वह नहीं माने। एक दिन ऋषि मुनियों की परीक्षा लेने भगवान के पुत्र को गर्भवती महिला बनाकर कुछ लोग ऋषियों के पास पहुंचे तो ऋषि क्रोधित हो गए और भगवान के पुत्र के पेट से निकले लोह पिंड को घिसने से बनी घांस से लड़ते समय यदुवंशियों का नाश हुआ। बलरामजी क्षीरसागर में प्रवेश कर गए और भगवान अपने धाम की ओर चले गए। कथा के दौरान इंद्रेश महाराज ने अर्जुन के गांर्धिव धनुष, राजा परीक्षित की कथा सुनाकर आरती के बाद कथा को विश्राम दिया।

भजनों में झूमे श्रद्धालु, भंडारा में रही भीड़

कथा के दौरान इंद्रेशजी महाराज ने एक के बाद एक कई भजनों की प्रस्तुति दी। वृंदावन प्यारो वृंदावन और आरती के दौरान श्रद्धालु भजनों में झूमते हुए नजर आए। कथा के समापन अवसर पर आयोजन स्थल पर भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रसादी ग्रहण करने भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बांके बिहारीजी महाराज के दर्शनों की इच्छा करते हुए कथा के बाद इंद्रेशजी महाराज वृंदावन की ओर रवाना हो गए।
भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी,सविता गोविंद सिंह राजपूत, नेवी जैन, अजित जायसवाल, जगन्नाथ गुरैया, मनीष चौबे, विक्रम सोनी, रामेश्वर नामदेव, विनय मिश्रा, मनोज जैन, दीना भाई मेहता, बंटी शर्मा, मेघा दुबे, स्वाति हल्वे, निशा शिन्दे, रूपा राज, माधुरी राजपूत, प्रीति शर्मा, प्रतिभा चौबे, कविता लारिया, प्रासुक जैन, श्रीकांत जैन, सुचिता दुबे, स्वाति हल्वे, अविनाश जैन,  अनूप उर्मिल, पराग बजाज, रानेश ओमरे, अरूण दुबे, अनूप बुधवानी, अमित बैसाखिया, नीरज यादव, निखिल अहिरवार, राहुल वैद्य, अंशुल गुप्ता, नमन समैया, जुगल प्रजापति, दीपक लोधी, शिवम् सूर्यवंशी, चिराग सबलोक, सुनीता रैकवार, पूजा श्रीवास्तव, आशा तिवारी, आरती सेन मंजूश्री चौरसिया, करण सैनी, प्रर्मिला मौर्य, मीरा चौबे, उर्मिला सहारे, सतीष जैन, नीलेश जैन, दशरथ मालवीय , नीलेन्द्र राजपूत, राहुल जैन, महेन्द्र राय, गौरव चौहान, मनोज रैकवार,  धर्मेन्द्र खटीक,  विशाल खटीक, विनोद तिवारी (श्री राम सेवा समिति), कैलाश हसानी (हरे माधव समिति), राहुल नामदेव, प्रणव कन्हौआ, गौरव नामदेव, राजीव जैन, ब्रजेश त्रिवेदीचेतराम अहिरवार, रीतेश तिवारी, विकास केशरवानी, अभिषेक अग्रवाल, नितिन साहू, कुलदीप खटीक सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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