
बुंदेली लोक नृत्य व नाट्य कला परिषद, कनेरा देव सागर, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित 15 दिवसीय कला कार्यशाला के अंतर्गत संचालित अंतिम 6 दिवसीय “चारकोल पोर्ट्रेट वर्कशॉप” के दूसरे दिन बच्चों एवं युवाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और सीखने की अद्भुत ऊर्जा ने सभी का मन मोह लिया। प्रशिक्षण शिविर का वातावरण पूरे समय कला, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रहा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक हेमंत ताम्रकार ने प्रतिभागियों को चारकोल पोर्ट्रेट निर्माण की सूक्ष्म तकनीकों, चेहरे के भावों की अभिव्यक्ति, प्रकाश और छाया के संतुलन तथा चित्रों में जीवंतता लाने की विशेष विधियों का प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने अत्यंत लगन और एकाग्रता के साथ अभ्यास करते हुए आकर्षक चित्र एवं प्रभावशाली पोर्ट्रेट तैयार किए, जिन्हें देखकर उपस्थित लोग उनकी प्रतिभा की मुक्त कंठ से सराहना करते नजर आए।
कार्यशाला ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण एवं छोटे क्षेत्रों में प्रतिभाओं का अथाह भंडार मौजूद है। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यही बच्चे भविष्य में कला जगत में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास, सीखने की जिज्ञासा और कला के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अभिभावकों एवं कला प्रेमियों ने संस्था द्वारा किए जा रहे इस रचनात्मक प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की। संस्था अध्यक्ष संतोष रामसहाय पांडे द्वारा निरंतर किए जा रहे कला एवं संस्कृति संरक्षण के प्रयासों की भी सभी ने सराहना की। उनके मार्गदर्शन में संस्था लगातार बच्चों और युवाओं को लोक कला एवं चित्रकला से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, जिससे क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। कार्यशाला प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक “पदश्री पं. रामसहाय पांडे गुरुकुल भवन, शिव धाम बाघराज वार्ड, तिली रोड” में आयोजित की जा रही है। प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है तथा प्रतिभागियों को आवश्यक सामग्री एवं प्रमाणपत्र भी संस्था द्वारा प्रदान किए जाएंगे। कार्यशाला में कु. श्रीम सराफ, श्रेया सोनी, मनस्वी जैन, अंतरा जैन, शम्भवी पचौरी, यशी जैन, सोनल जैन, अवनी जैन, श्रेया जैन, परिणीति जैन, मुस्कान जैन, पलक साहू, निशिता जैन, आशी कोरी, काजल जैन, साक्षी पांडे, मानसी पांडे, वाशु, हर्षित, सोमू, पंकज दांगी, अक्षय दांगी सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे।
