
उपभोक्ता आयोग के 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा
डॉ. मोहन यादव सरकार का कर्मचारी हितैषी फैसला, वर्षों की सेवा का मिला सम्मान
सागर। प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विशेष प्रयास से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारी हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग तथा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोगों में कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। शासन ने विशेष प्रकरण मानते हुए इन कर्मचारियों को “स्थायी कर्मी” के रूप में मान्यता प्रदान करने की अनुमति दे दी है। खाद्य विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग एवं जिला आयोगों में कार्यरत 29 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा 5 ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर पदों पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग के वर्ष 2016 के परिपत्र के अनुसार 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ देने के लिए शासन की पूर्व अनुमति आवश्यक थी। राज्य शासन ने इस मामले को विशेष परिस्थिति मानते हुए “वन टाइम रिलेक्सेशन” प्रदान किया है, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायित्व और सेवा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
इस निर्णय को मंत्रिपरिषद की 9 जून 2026 को आयोजित बैठक में स्वीकृति प्राप्त हुई थी। इसके बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर संबंधित कर्मचारियों को स्थायी कर्मी मान्य किए जाने की अनुमति प्रदान की।
खाद्य मंत्री श्री राजपूत के अनुसार इस निर्णय से कर्मचारियों को न केवल सेवा सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उन्हें शासन के नियमानुसार वेतन निर्धारण एवं अन्य सुविधाओं का लाभ भी प्राप्त होगा। वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए यह निर्णय राहत और संतोष लेकर आया है। सरकार के इस कदम को कर्मचारी कल्याण और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा तथा वे अधिक उत्साह और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
